आपणी भासा म आप’रो सुवागत

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सोमवार, 24 अक्तूबर 2011

चाळो राजस्थानी बांचणो सीखां -३ - शंभु चौधरी

पाठ - 3
रेल मुगलसराय टेसण पर रूकी। - रेलगाड़ी मुगलसराय स्टेशन पर रूकी।
पारवती खड़की सूं झांकी। - पार्वती खिड़की से झांकने लगी।
घणी भीड़ छी। - बहुत भीड़ थी।
टाबर भूखा छा। - बच्चा भूखा था।
दूध लेबा टेसण पे उतरी। - दूध लेने स्टेशन पर उतरी।
बै दिन तो बे ही दिन हा। - वे दिन तो कुछ ओर दिन थे।
गंगासागर सूं पाछा हावड़ा आवतां म्हानै खासी रात पड़गी। - गांगासागर से लौटते वक्त हमें बहुत रात हो गई।
कोलकाता रै बाजार में हर तरै रौ सामान मिलै। - कोलकाता के बाजार में हर तरह का सामान मिलता है।
इंया पल्लौ झाड़ियां काम कोनी चालै। - इस तरह पल्ला झाड़ने से काम नहीं चलेगा।



यहाँ एक जगह ‘री’ एवं दूसरी जगह ’र का प्रयोग हुआ है।
यहां इसका प्रयोग इस प्रकार समझें -

म्हैं म्हारी अम्मी री बात सुण’र चुप हुयग्यौ।
हम हमारी अम्मा की बात सुन कर चुप हो गये।

यहाँ दो जगह ‘री’ का प्रयोग हुआ है। जिसका अर्थ अलग-अलग निकलता है
यहां इसका प्रयोग इस प्रकार समझें -

आठ-बरसां री उडीक पाछै केस री आखरी तारीख आई।
आठ वर्षों से इंतजार करने के बाद केस की आखिरी तारीख्र आई।


राजस्थानी - हिन्दी
टेसण - स्टेशन
खड़की - खिड़की
घणी - बहुत
छी - थी
लेबा - लेने
म्हैं - हम
म्हारी - हमारी
र, रा, री - क, का, की
बै - वे
बे ही - कुछ ओर
हा - थे
सूं - से
पाछा - वापस
आवतां - लोटना
म्हानै - हमें
खासी - बहुत
पड़गी - हो गई
रै - के
तरै - तरह
रौ - का
इंया - इस तरह से
पल्लौ - पल्ला, साड़ी का पल्ला
झाड़ियां - झाड़ना
कोनी - नहीं
चालै - चलेगा

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