आपणी भासा म आप’रो सुवागत

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गुरुवार, 31 जुलाई 2008

अपने वोट बेचते हो!

- शम्भु चौधरी


मंहगाई से त्रस्त, समस्याग्रस्त
एक किसान ने जैसे ही,
अपने सांसदों के हाथों में
नोटों के बण्डल देखे,
बड़ी हीन भावना से चिल्लाया-
देखो! देखो! भागवान!
संसद को कैसे नंगा किया
यह इंसान!
पास खड़ी पत्नी चिल्लाई
बड़ी नेकी बखानते हो!
इलेक्सेन के समय
तुम भी तो
एक जोड़ी धोती के लिए
अपने वोट बेचते हो!।

1 टिप्पणी:

  1. कितनी ग़लत बात है. किसान के वोट कि कीमत एक धोती और सांसद के वोट की कीमत तीन करोड़.

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