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रविवार, 11 जनवरी 2009

राजस्थानी भाषा में शपथ नहीं ली जा सकती


खुद की भाषा नहीँ बची तो भारतीय संस्कृति कैसे बचेगी?-
भास्कर न्यूज
Friday, January 02, 2009 10:39 [IST]
जयपुर. तेरहवीं विधानसभा के पहले सत्र के पहले ही दिन राजस्थानी भाषा का मुद्दा छाया रहा। कुछ सदस्यों ने राजस्थानी भाषा में शपथ लेने की अपनी भावनाओं से सदन को अवगत कराया। विधानसभा के अस्थायी अध्यक्ष को बार बार व्यवस्था देकर सदस्यों को यह बताना पड़ रहा था कि राजस्थानी भाषा आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं है इस कारण इसमें शपथ नहीं ली जा सकती।
भाजपा के डॉ.गोपाल कृष्ण जोशी ने विधानसभा कार्य संचालन नियमों का हवाला भी दिया और कहा कि अध्याय दो में सदस्यों के शपथ लेने के बारे में तो लिखा हुआ है लेकिन किस भाषा में लिया जाए इसका उल्लेख नहीं है। अध्यक्षीय व्यवस्था के बाद उन्हें भी हिंदी में शपथ लेनी पड़ी। राजस्थानी में शपथ की मांग भाजपा के अजरुन लाल गर्ग, कसमा मेघवाल, कल्याणसिंह चौहान, बाबूसिंह राठौड़, राजकुमार रिणवा, शंकरसिंह रावत निर्दलीय नानालाल, कांग्रेस के प्रदीपकुमार सिंह, प्रमोदकुमार भाया ने की। राजस्थानी में शपथ लेने की मांग की। उल्लेखनीय है कि सदस्यों को राजस्थानी में शपथ लेने के लिए अखिल भारतीय राजस्थानी भासा मान्यता संघर्ष समिति की ओर से प्रेरित किया गया। समिति के प्रदेश अध्यक्ष (पाटवी) हरिमोहन सारस्वत और प्रदेश महामंत्री डॉ. राजेंद्र बारहठ ने न सिर्फ सभी सदस्यों को नववर्ष की शुभकामनाओं पत्र भेजा अपितु इसके साथ शपथ का राजस्थानी प्रारुप भी भेजा ताकि किसी सदस्य को दिक्कत नहीं आए। पत्र में कन्हैयालाल सेठिया और रामस्वरूप किसान के दोहों का भी उल्लेख किया गया जिसमें मातृ भाषा को अपनाने की प्रेरणा दी गई है।


नोट: सरम आवै जद म्हें खुद नै राजस्थानी कह्‌वु. म्हें फक्त नांव रौ राजस्थानी, सरकार गुमान दरसावै राजस्थान रै इतिहास माथै अर जय जय राजस्थान रा नारा देवै बोट लेवण खातर.कांई आपां राजस्थानी ऎड़ा परवाड़ीयोड़ा हौ, कै आपां आपणी भासा नीं वापर सकौ. अबार रा चुणावां मांय जित्योड़ा MLA जद Assembly मांय राजस्थानी भासा मांय सौगंध लेवण लागा तौ वांनै रोक्या ग्या.कांई राजस्थांन मांय राजस्थानी बोलणी, पाप समझीयौ जावै है.अबार नीं चेत्या तौ घणौ मोड़ौ हु जासी...... चेत मानखा चेत जमानौ चेतण रौ आयौ ..

1 टिप्पणी:

  1. राजस्थानी में शपथ नही लेने के मुद्दे को अगर राजस्थान के विधायक गंभीरता से नही उठाते, तब यह समाज लेनी चाहेये के राजस्थानी भाषा का कई भविष्य नही है.

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