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शनिवार, 28 जून 2008

गोपाल कलवानी


श्री गोपाल कलवानी जैसा मूर्धन्य कलाकार हमारे समाज में विद्यमान है यह हमारे लिए गर्व की बात है। बीकानेर जैसे छोटे से शहर में 11 अगस्त 1949 को जन्म लेकर कलकत्ता एवं मुंबई जैसे महानगर की ग्लैमर से जगमगाती दुनिया में अपना स्थान बनाने का इनका सफर मुश्किल नहीं तो इतना आसान भी नहीं था। दूरदर्शन, रेडियो एवं फिल्म अभिनेता, नाटकों के निर्देशक, नाट्यकार, गीतकार, कवि, लेखक एवं कई संगीत संस्थानों से जुड़ा यह व्यक्तित्व आज भी अपनी ही मस्ती में और नई ऊँचाइयों की ओर निरंतर अग्रसर है ।
सन् 1971 से शुरू हुए इस सफर के दौरान करीबन 25 नाटकों में अभिनय, 15 नाटकों का निर्देशन, 18 दूरदर्शन
धारावाहिकों में अभिनय, एफ. एम. रेडियो में बतौर एनाउन्सर अपनी सेवाएँ प्रदान करते हुए अनेक गीतों एवं कविताओं व गजलों की रचना का इनका सुनहरा सफर आज भी अनवरत जारी है। आकाशवाणी कलकत्ता के साथ करीब तीस वर्षों से जुड़े रहने का सौभाग्य भी इन्हें प्राप्त है। दूरदर्शन में कई धारावाहिकों जैसे-हिन्दी में गणदेवता, चरित्रहीन, साहब, बीबी और गुलाम तथा बंगला में पाँचतारा, प्रतिबिम्ब में इन्होंने अपनी अभिनय क्षमता को बड़े ही सशक्त रूप में प्रस्तुत किया ।
टी. वी. धारावाहिकों के अलावा आपने कई फिल्मों में भी अपने कुशल अभिनय की छाप छोड़ी है। सत्यजित राय की ‘शतरंज के खिलाड़ी’ मृणाल सेन की तेलगु फिल्म ‘ओकाओरी कथा’ गौतम घोष की ‘यात्रा’ इत्यादि फिल्मों में अभिनय करते हुए संजीव कुमार, सईद जाफरी, राहुल बोस, रीमी सेन, नाना पाटेकर सरीखे चोटी के कलाकारों के सानिध्य से आपकी अभिनय क्षमता को नए आयाम मिले ।
अभिनय के क्षेत्र में अपने जौहर दिखलाने के बाद इनका झुकाव नाट्य निर्देशन की ओर हुआ और ‘अनामिका’ के लिए निर्देशित नाटक ‘मिसआलूवालिया’ दर्शकों के बीच काफी चर्चित रहा। इसके अलावा गुस्ताखी माफ, जुकाम जारी है, देश-प्रदेश, रीति-रिवाज एवं बड़ी बुआजी सरीखे कई नाटकों का सफल निर्देशन कर एक कुशल निर्देशन के रूप में प्रतिष्ठित हुए ।
हाल ही में इनके दो राजस्थानी नाट्य रूपांतरण ‘जंजाल’ एवं ‘फूटरी बीनणी’ भी प्रकाशित हुए हैं जिनका प्रकाशन मारवाड़ी युवा मंच, उत्तर मध्य कलकत्ता शाखा द्वारा किया गया। बंगला भाषा से अनूदित नाटक ‘दुर्गेश नंदन’ का राजस्थानी नाट्य रूपांतरण अभी अप्रकाशित है। आप अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच के राष्ट्रीय, प्रांतीय व शाखा स्तर पर कई पदों पर रह चुके हैं ।

वरिष्ठ रंगकर्मी गोपाल कलवानी के निर्देशन में नवनिर्मित नाट्य संस्था ‘अकृत’ ने अपनी पहली नाट्य प्रस्तुति मशहूर कथाकार विजय दान देथा की चर्चित कृति ‘अमिट लालसा’ के हिंदी नाट्य-रूपान्तर ‘मायाजाल’ का मंचन ज्ञानमंच में प्रस्तुत किया। कोलकाता के नाट्य प्रेमी गोपाल कलवानी से भली-भांति परिचित हैं क्योंकि वे नाटकों, टीवी सीरियलों और फिल्मों में उनकी अभिनय प्रतिभा का जायजा ले चुके हैं। एक अर्से बाद नाटकों की दुनिया में यह उनका पुनः प्रवेश है।
राजस्थानी पृष्ठभूमि पर आधारित इस नाटक ‘मायाजाल’ को राजस्थान की लोकधुनों पर आधारित स्वरचित गीतों से सजा कर निर्देशक गोपाल कलवानी ने प्रस्तुति को एक खूबसूरत लोकशैली का रूप दिया और बीच-बीच में समूह-नृत्यों के समावेश से प्रस्तुति को रोचक बना दिया ।
अकृतः एक नव-निर्मित नाट्य-संस्था है जिसका मूल उद्देश्य है कोलकाता में हिन्दी नाट्य-मंच पर व्याप्त शून्य में से गुजरते हुए उसे इकाइयों, दहाइयों एवं ईश्वर चाहे तो अनगिनत संख्याओं में परिवर्तित करना ।
हिंदी नाट्य-मंच जिसका स्वर्णिम अतीत आसमान की ऊँचाइयाँ पाने के बाद बादलों के पीछे ओझल होता प्रतीत हो रहा था, बादलों के साये में से उसके अलौकिक आलोक का उद्दीपन आपको नजर आये, उसे उसका वर्तमान मिल जाए । ‘अकृत’ नाटक के साथ-साथ कला एवं संस्कृति के हर क्षेत्र में कार्य करने को प्रस्तुत है। गीत-संगीत नृत्य, चित्रकला व साहित्य सभी लौह कड़ियों से एक ऐसी मजबूत श्रंृखला बने जिसे चाहकर भी कोई तोड़ न पाये-अकृत के कार्य कलापों में यही भावना परिलक्षित होगी । इसके प्रमाण स्वरूप ‘अकृत’ की पहली प्रस्तुति ‘मायाजाल’ है। विजयदान की राजस्थानी कहानी ‘अमित लालसा’ पर आधारित यह संगीतमय नाटक दर्शकों को खूब पंसद आया। निर्देशक गोपाल कलवानी ने स्वरचित गीतों और लोक नृत्यों के माध्यम से इसे लोक नाटक का रूप दे दिया है ।
सम्पर्क: 9830606890

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