आपणी भासा म आप’रो सुवागत

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बुधवार, 30 जुलाई 2008

शम्भु चौधरी की चार झणिका- 2

1. गंगा
तन मन से जो हो
नंगा
उसका नाम है,
गंगा।


2.सत्ता की कुंजी
जेब में हो नोट
और
धर्मनिरपेक्षाता
के वोट।


3. परिभाषा
एक भाषा जो दूसरी भाषा को
बांटता हो,
उस भाषा को कहते हैं
परिभाषा।


4. शांति
धमाके से फैली
अशांति,
फिर हर तरफ
शांति ही शांति

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