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शुक्रवार, 15 जनवरी 2010

देश रंगीला

अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मलेन
के कौस्तुभ जयंती वर्ष पर


श्री संजय बिन्नाणी, कोलकाता द्वारा


Sanjay Binani


हम भारतवासी, भारतवासी हम ...

खटने-खाने को निकले, मरुधर-हरियाणा से हम
हर कोने (तक) पहुँचे हम ... भारतवासी हम ...


सदियों से फिरते-फिरते, जो कुछ है हमने देखा
जीवन संस्कृति का दर्शन - भारत सा कहीं ना देखा
बोली है अनगिन अपनी, संगीत अनोखा अपना
हैं नृत्य-गीत अलबेले, त्योहार खिलाते सपना
हम करते सबका पूजन, जड़ हो या फिर हो चेतन
अभिनन्दन (शुभ) अभिनन्दन ... भारतवासी हम ....

मणिपुर
भारत की मणि कहलाए, मुंदरी सा मणिपुर भाए
तैंतीस कबीले इसके, मणियों से चमकत जाए
यह अर्जुन की ससुराला, यहाँ नाचत हर एक बाला
भाषा भी विष्णुप्रिया है, बाजत मिरदंग निराला
महारास हैं पाँच तरह की, तांडव संग पंग-परेंगी
बाँशी पर है सरगम ... भारतवासी हम ...

सोनार बांग्ला
है शस्य-श्यामला प्यारी, यह बंगभूमि सोनारी
यहाँ शंखनाद करते हैं - हर घर-घर में नर-नारी
हरे कृष्ण-हरे रामा का - चैतन्य कीरतन होता
माँ काली के आँचल में, हर कोई चैन से सोता
बंकिम का वन्देमातरम, रवि ठाकुर का जन-गण-मन
गाते (हैं) हिलमिल कर हम ... भारतवासी हम ...

तमिलनाडु
यहाँ सेतुबंध, रामेशं, तप रता कुमारी कन्या है
मदुरई, मीनाक्षी, काँची की यह धरती धन्या है
यहाँ विवेकानंद - शिला पर 'ठाकुर' के दर्शन पाए
द्रविड़ों का तमिलनाडु यह, यहाँ तमिळ है बोली जाये
धर त्रिपुंड नटराज-महेश्वर निरत करत हैं भरतनाटियम
(देखो नटराज-महेश्वर, नर्तनरत शिव सुंदरतम)
डिमि-डिमि-डिमि-(डिमि)-डडम-डम्म .... भारतवासी हम ...

गुर्जरी
हर गाँव-शहर निखरा है, ले नयी चमक उभरा है
लक्ष्मी संग नारायण का ज्यों गरुड़ यहाँ उतरा है
हर सोमनाथ जय-जय-जय, द्वारिकाधीश की जय-जय
है अक्षरधाम निराला, स्वामीनारायण की जय
तमे केम छो बोलो भाई, जय पावागढ़ नी माई
(है) ढोल बजा लो ढम-ढम ... भारतवासी हम ...

रजवण
नीरस है मगर रसीली, सोनाली - घणी रंगीली
मरुधर री माटी माँ है - बलिदानी, सती, हठीली
धोरे हैं परम तपस्वी, और मोर हैं गहन मनस्वी
गो-वंश, ऊँट, घोड़े भी - जग भर में हुए यशस्वी
शूरों - संतों - भक्तों की, सेठों की, अलमस्तों की
(हैं) बातें अदभुत - अनुपम ... भारतवासी हम ...

पंचनद प्रदेश
अमरित सरवर लहराए, बल्ले-बल्ले हो जाये
यहाँ सोने सी फसलों पर, भंगड़ा पा - गिद्धा पायें
सरदार कहाए काका, मितरां नूं कहंदे पाप्पा
जट यमला पगला दीवाना, पगड़ी सम्हालते जाना
नानक, हर, तेगबहादुर, अर्जुन, गुरु गोबिंद के गुन
आओ गायें हम-तुम ... भारतवासी हम ...

उत्तर प्रदेश
बाबा की नगरी काशी, श्री राम अवधपुर वासी
संगम पर आकर देखा - यहाँ घट-घट है अविनाशी
तुलसी और सूर, कबीरा की वाणी (है) भजन सुनाती
माँ विन्ध्य-वासिनी ज्वाला है जीवन ज्योत जगाती
ब्रज राधे-राधे जपता, कान्हा गोकुल में रमता
मन-मधुवन (ही) वृन्दावन ... भारतवासी हम ...

संजय बिन्नाणी

१४.१२.२००९

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